मुकेशआ अब लौट चलेंआ अब लौट चलेंनैन बिछाए बाँहें पसारे तुझको पुकारे देश तेराआ अब लौट चलेंआ अब लौट चलेंनैन बिछाए बाँहें पसारे तुझको पुकारे देश तेरा
लताआ जा रे आ जा रे
साथीआ आ आ
लताआ आ आआ जा रे
लताआ आ आ
मुकेशसहज है सीधी राह पे चलनादेख के उलझन बच के निकलनाकोई ये चाहे माने न मानेबहुत है मुश्किल गिर के सम्भलनाआ अब लौट चलेंआ अब लौट चलेंनैन बिछाए बाँहें पसारे तुझको पुकारे देश तेरा
लताआ जा रे आ जा रेआ जा
मुकेशआँख हमारी मंज़िल पर हैदिल में ख़ुशी की मस्त लहर हैलाख लुभाएँ महल पराएअपना घर फिर अपना घर हैआ अब लौट चलेंआ अब लौट चलेंनैन बिछाए बाँहें पसारे तुझको पुकारे देश तेराआ अब लौट चलें
मुकेशआ अब लौट चलें
साथीआ आ आ आ आ
(अतिरिक्त अंतरा)जिस मिट्टी ने जनम दिया है गोद खिलाया प्यार किया है तू जिस माँ को भूल गया था आज उसी ने याद किया है आ अब लौट चले
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